क्या है CoBRA और कौन हैं Cobra Commandos ?

क्या है CoBRA और कौन हैं Cobra Commandos ?

What is Cobra and who are Cobra Commandos?

2008 में स्थापित, COBRA भारतीय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक विशेष इकाई है और गुरिल्ला रणनीति और जंगल युद्ध कला में कुशल है।

मूल रूप से नक्सली समस्या का मुकाबला करने के लिए इसे स्थापित किया गया था और इसे मूल रूप से छोटे नक्सली समूहों को ट्रैक करने, शिकार करने और खत्म करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था।

वर्तमान में दस बटालियन (2008 और 2011 के बीच स्थापित) की संख्या के साथ COBRA को भारत की एक अधिक अनुभवी और सफल कानून प्रवर्तन इकाइयों में स्थान दिया गया है।

एमएचए यू.ओ. न० 16011/5/200-PF.IV दिनांक 12/09/2008 आंतरिक चरमपंथियों और विद्रोहियों के खिलाफ गुरिल्ला / जंगल युद्ध-शैली संचालन के लिए COBRA की स्थापना के लिए अनुमोदन प्रदान करता है।

2009 से 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार COBRA बटालियन 12,817 ऑपरेशनों में शामिल हुई है जिसमें :

261 नक्सली / विद्रोही मारे गए हैं;
2,018 को गिरफ्तार किया गया;
775 ने आत्मसमर्पण किया;
827 विभिन्न प्रकार के हथियारों पर कब्जा;
21,064 विभिन्न प्रकार के गोला बारूद पर कब्जा कर लिया;
9,989 किलोग्राम विस्फोटक पकड़ा;
2,887 बम, IED और हथगोले पकड़े; तथा
9,758 डेटोनेटर पकड़े गए।

ये आंकड़े अपने आप मैं अद्भुत हैं और इस महान इकाई के शौर्य और बलिदान की पराकाष्ठा हैं।

बेलगाम और कोरापुट में कोबरा जंगल युद्ध संस्थानों में प्रशिक्षित की जाती है। उनका प्रशिक्षण शासन और अवधि एनएसजी कमांडोज के समान है। उन्हें जंगल युद्ध पर मुख्य ध्यान देने के साथ छलावरण और जंगल युद्ध की कला को अनुकूलित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

सभी कर्मियों को हवाई हमले की तकनीक और हवा द्वारा दुश्मन के इलाके में तैनात होने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। मानक से मेल खाते हुए अपने शारीरिक और फायरिंग कौशल की जांच के लिए कमांडो को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाता है।

उनकी भूमिका टोही और लंबी दूरी की गश्त करने, विद्रोहियों के ठिकाने पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और आवश्यकता पड़ने पर घात और सटीक हमले करने की भी है।

कोबरा कमांडो बनने के लिए CRPF द्वारा समय समय पर जवानों के नाम मांगे जाते हैं और कुछ जवान उनकी आयु के आधार पर टेस्ट के लिए भेजे जाते हैं।

कोबरा में आने के लिए सबको एक स्क्रीनिंग टेस्ट देना पड़ता हैं जिसमे 10km दौड़ 100mtr दौड़ लम्बी कूद और बीम होते हैं। उसके बाद इंटरव्यू होता है। चयनित किये गए जवानों को 3 महीने के कठिन प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है।

इस प्रशिक्षण में हर उस अनुभव से गुज़ारा जाता है जो की ड्यूटी के दौरान उसके साथ होने की सम्भावना होती है। और इस सब के पार जो निकल कर आता है वह अपने कंधे पर लगता है कमांडो का बैज।

क्यूंकि कोबरा CRPF का ही एक अंग है इसलिए इसमें अलग से कोई भर्ती नहीं होती।

अन्य शाखा (जैसे की मंत्रालय, मेडिकल, सिग्नल इत्यादि ) के जवान भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

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